कहाँ सुनते हैं
रंग-रूप
रंग-रूप में सुनी जाने वाली बातें। जो जानी-पहचानी लगे, उसे चुनिए।
- “अरे वाह, वज़न उतार लिया तूने!” इतना क्यों चुभता है?
- “अरे, उम्र से कितने बड़े लगने लगे हो!” इतना क्यों चुभता है?
- “अरे, वज़न बढ़ा लिया है क्या?” इतना क्यों चुभता है?
- “आज मेकअप नहीं?” इतना क्यों चुभता है?
- “आप इतने सादे कपड़े क्यों पहनते हैं?” इतना क्यों चुभता है?
- “आप ऐसे कपड़े क्यों पहनते हैं?” इतना क्यों चुभता है?
- “आप तो बच्चे लग रहे हैं, इस कुर्सी पर?” इतना क्यों चुभता है?
- “आप फ़ोटो से अलग दिखते हैं” इतना क्यों चुभता है?
- “आपके चेहरे को क्या हुआ?” इतना क्यों चुभता है?
- “क्या बात है, थके-थके लग रहे हो?” इतना क्यों चुभता है?
- “थोड़ा स्माइल किया करो, अच्छा लगता है” इतना क्यों चुभता है?
- “थोड़ा स्मार्ट ड्रेस किया कीजिए” इतना क्यों चुभता है?
- “थोड़ी कोशिश करो तो छा जाओ” इतना क्यों चुभता है?
- “पहले की फ़ोटो में तो ज़्यादा जँचते थे” इतना क्यों चुभता है?
- “पहले वाला कट ही अच्छा था” इतना क्यों चुभता है?
- “बाल खुले रख लो, ज़्यादा अच्छा लगेगा” इतना क्यों चुभता है?
- “ये असली बाल हैं?” इतना क्यों चुभता है?
- “ये पहनकर जाना है?” इतना क्यों चुभता है?
- “ये रंग आप पर जँच नहीं रहा” इतना क्यों चुभता है?
- “हाइट कितनी है, पूरे-पूरे?” इतना क्यों चुभता है?