कहाँ सुनते हैं
करियर और तुलना
करियर और तुलना में सुनी जाने वाली बातें। जो जानी-पहचानी लगे, उसे चुनिए।
- ““अच्छी-भली नौकरी थी, ये क्या हुआ?”” इतना क्यों चुभता है?
- ““अब तक तो मुझे…”” इतना क्यों चुभता है?
- ““तुम भी निकल लेते, मौक़ा था।”” इतना क्यों चुभता है?
- ““पैकेज कितने का है आजकल?”” इतना क्यों चुभता है?
- ““प्रमोशन कब हो रहा है?”” इतना क्यों चुभता है?
- “अपना धंधा क्यों नहीं शुरू करते?” इतना क्यों चुभता है?
- “अरे, अभी तक वहीं हो?” इतना क्यों चुभता है?
- “आप तो ओवरक्वालिफ़ाइड हैं” इतना क्यों चुभता है?
- “आपकी उम्र के सब लोग तो अब मैनेजर हैं” इतना क्यों चुभता है?
- “आपकी तो लाइफ़ सेट है, बाहर रहते हैं!” इतना क्यों चुभता है?
- “और, सेटल हुए कि नहीं अभी?” इतना क्यों चुभता है?
- “कुछ पक्का नहीं चाहिए क्या आपको?” इतना क्यों चुभता है?
- “कोई बात नहीं, मैं बिल्कुल बेसिक से समझा देता हूँ” इतना क्यों चुभता है?
- “देखो, आज कहाँ पहुँच गया वो” इतना क्यों चुभता है?
- “पाँच साल हो गए, अब तक प्रमोशन नहीं?” इतना क्यों चुभता है?
- “मेरी सहेली के बेटे का बड़ा पैकेज लग गया” इतना क्यों चुभता है?
- “ये भी कोई नौकरी है?” इतना क्यों चुभता है?
- “सरकारी नौकरी ज़्यादा सेफ़ होती है, है ना?” इतना क्यों चुभता है?
- “हमें किसी ज़्यादा सीनियर की तलाश है” इतना क्यों चुभता है?