कहाँ सुनते हैं
दोस्त-यार
दोस्त-यार में सुनी जाने वाली बातें। जो जानी-पहचानी लगे, उसे चुनिए।
- “अरे यार, तुम वहाँ होते तो समझते!” इतना क्यों चुभता है?
- “अरे, कल तेरा बर्थडे था ना?” इतना क्यों चुभता है?
- “अरे, तुम दोनों की अब बात नहीं होती?” इतना क्यों चुभता है?
- “अरे, तू प्लानर है, तू बुक कर दे!” इतना क्यों चुभता है?
- “अरे, बताना चाहिए था न!” इतना क्यों चुभता है?
- “अरे, बस ऐसा कर ले यार…” इतना क्यों चुभता है?
- “अरे, मुझे तो जानते ही हो, मैं तो हमेशा लेट हूँ!” इतना क्यों चुभता है?
- “इसका मतलब क्या हुआ?” इतना क्यों चुभता है?
- “कुछ भी चलेगा, तुम लोग डिसाइड करो” इतना क्यों चुभता है?
- “चल न यार, बस एक बार” इतना क्यों चुभता है?
- “चलो, आज तो अच्छा किया… पहली बार!” इतना क्यों चुभता है?
- “चिल कर यार, मज़ाक ही तो था!” इतना क्यों चुभता है?
- “तुम्हारे लिए तो चुटकी का काम है, बस ज़रा-सा देख लो ना?” इतना क्यों चुभता है?
- “मेबी लिख लो, बाद में बताते हैं” इतना क्यों चुभता है?
- “यार, अचानक कुछ काम आ गया…” इतना क्यों चुभता है?
- “यार, अब मैं क्या करूँ?” इतना क्यों चुभता है?
- “ये तो कुछ नहीं, मेरी सुनो तो!” इतना क्यों चुभता है?
- “लंबी कहानी है, तुम थे नहीं” इतना क्यों चुभता है?
- “वॉइस नोट सुना कि नहीं?” इतना क्यों चुभता है?
- “सॉरी यार, बहुत बिज़ी था!” इतना क्यों चुभता है?
- “सॉरी, अगर तुझे बुरा लगा तो” इतना क्यों चुभता है?