कहाँ सुनते हैं
पढ़ाई और नतीजे
पढ़ाई और नतीजे में सुनी जाने वाली बातें। जो जानी-पहचानी लगे, उसे चुनिए।
- “इस डिग्री का करोगे क्या?” इतना क्यों चुभता है?
- “और मेहनत करो, पढ़ाई में ध्यान लगाओ” इतना क्यों चुभता है?
- “चेक भी किया था, या बस जमा कर दिया?” इतना क्यों चुभता है?
- “ट्यूशन लगवा दी, इतना काफ़ी थोड़े ही है, और पढ़ो” इतना क्यों चुभता है?
- “तुम्हारी फ़ीस में हमने इतना पैसा लगाया है” इतना क्यों चुभता है?
- “तुम्हारे कज़िन की रैंक तुमसे अच्छी आई है” इतना क्यों चुभता है?
- “तुम्हारे हाथ कुछ नहीं आएगा” इतना क्यों चुभता है?
- “तुम्हें साइंस लेनी चाहिए थी” इतना क्यों चुभता है?
- “नंबर ही सब कुछ हैं” इतना क्यों चुभता है?
- “पढ़ाई की भी थी, या नहीं?” इतना क्यों चुभता है?
- “पढ़ाई शुरू की या अभी नहीं?” इतना क्यों चुभता है?
- “फिर वही लापरवाही वाली ग़लतियाँ?” इतना क्यों चुभता है?
- “बस इतना ही?” इतना क्यों चुभता है?
- “बस इतने ही नंबर आए?” इतना क्यों चुभता है?
- “ये कोर्स क्यों ले लिया तुमने?” इतना क्यों चुभता है?
- “रैंक कितनी आई?” इतना क्यों चुभता है?
- “सब तो टॉपर नहीं बन सकते न, चलो कोई बात नहीं” इतना क्यों चुभता है?
- “सेकंड ही क्यों?” इतना क्यों चुभता है?