कहाँ सुनते हैं
जब कोई नहीं सुनता
जब कोई नहीं सुनता में सुनी जाने वाली बातें। जो जानी-पहचानी लगे, उसे चुनिए।
- ““ये तो तुम पहले भी बता चुके हो।”” इतना क्यों चुभता है?
- “अच्छा सुन, मेरे साथ क्या हुआ…” इतना क्यों चुभता है?
- “अब छोड़ो भी, कब तक वही बात?” इतना क्यों चुभता है?
- “अब ये रोना किस बात का?” इतना क्यों चुभता है?
- “अभी टाइम नहीं है, बाद में बात करते हैं” इतना क्यों चुभता है?
- “इतना नेगेटिव मत बोलो, बस पॉज़िटिव सोचो” इतना क्यों चुभता है?
- “इतना सुनेगा कौन?” इतना क्यों चुभता है?
- “उनका वो मतलब नहीं था” इतना क्यों चुभता है?
- “एक लाइन में बोलो” इतना क्यों चुभता है?
- “ओवरथिंक मत करो, यार” इतना क्यों चुभता है?
- “छोड़ो ना, कुछ और बात करो” इतना क्यों चुभता है?
- “ठीक है, पर मैं इसमें क्या करूँ?” इतना क्यों चुभता है?
- “तुम बहुत सेंसिटिव हो” इतना क्यों चुभता है?
- “तुम्हारा तो हर बात में ड्रामा है” इतना क्यों चुभता है?
- “पहले मुझे पूरा बोलने दो” इतना क्यों चुभता है?
- “ये सब बातें घर में नहीं होतीं” इतना क्यों चुभता है?
- “राई का पहाड़ मत बनाओ” इतना क्यों चुभता है?
- “रिलैक्स, इतनी बड़ी बात नहीं है” इतना क्यों चुभता है?
- “हम्म? कुछ कहा क्या?” इतना क्यों चुभता है?
- “हर बात में इमोशन मत घुसाओ” इतना क्यों चुभता है?