कहाँ सुनते हैं
अपनापन और पहचान
अपनापन और पहचान में सुनी जाने वाली बातें। जो जानी-पहचानी लगे, उसे चुनिए।
- ““इंग्लिश में बोलो।”” इतना क्यों चुभता है?
- ““ठीक से बोलो।”” इतना क्यों चुभता है?
- ““तुम में अब वो इंडियन वाली बात नहीं रही।”” इतना क्यों चुभता है?
- ““तो, नया शहर कैसा लग रहा है?” इतना क्यों चुभता है?
- ““धन्यवाद, पर इस बार नहीं हो पाएगा।”” इतना क्यों चुभता है?
- ““बुरा नहीं है यार, पर घर जैसा नहीं है, न?”” इतना क्यों चुभता है?
- ““वहाँ रहने का सच में कोई फ़ायदा है क्या?”” इतना क्यों चुभता है?
- ““सब आए हैं, बस तुम ही नहीं हो!”” इतना क्यों चुभता है?
- “अपनी बोली भी आती है कि नहीं?” इतना क्यों चुभता है?
- “अब तो बड़े आदमी बन गए हो न?” इतना क्यों चुभता है?
- “आप तो पूरे वेस्टर्न हो गए हैं” इतना क्यों चुभता है?
- “आप यहाँ के तो नहीं लगते” इतना क्यों चुभता है?
- “आपका लहजा तो बड़ा मज़ेदार है” इतना क्यों चुभता है?
- “जड़ें भूल गए हो” इतना क्यों चुभता है?
- “जहाँ से आए हो, वहीं वापस जाओ” इतना क्यों चुभता है?
- “तुम्हारी बोली अब हमारे जैसी नहीं लगती” इतना क्यों चुभता है?
- “तो अब घर कौन-सा है?” इतना क्यों चुभता है?
- “वैसे असल में आप कहाँ के हैं?” इतना क्यों चुभता है?