कहाँ सुनते हैं
मन की मान्यताएँ
मन की मान्यताएँ में सुनी जाने वाली बातें। जो जानी-पहचानी लगे, उसे चुनिए।
- मन में बार-बार “अपनाए जाने के लिए सबके जैसा होना पड़ता है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “अपनी कामयाबी की बात करना शेखी बघारना है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “अपनी चाह माँगना बदतमीज़ी है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “अपनी जगह मुझे कमानी पड़ती है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “अब अपना मन बदलना मुमकिन नहीं” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “अब तक तो मुझे इससे उबर जाना चाहिए” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “अब शुरू करने में बहुत देर हो चुकी है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “असहमत हुए तो रिश्ता नहीं बचेगा” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “आराम किया तो मैं आलसी हूँ” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “इस उम्र में जहाँ होना चाहिए, वहाँ नहीं हूँ” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “जब कोई आगे बढ़ता है, मेरा नंबर पीछे खिसक जाता है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “जवाब तुरंत देना ही पड़ेगा” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “देर-सवेर मेरी पोल खुल ही जाएगी” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “ना कहना स्वार्थ है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “पहला नंबर नहीं, तो हार” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “फ़ैसले से पहले मुझे पूरा यक़ीन चाहिए” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “बदलने का मतलब है अपनी जड़ों को भूल जाना” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “भावनाएँ दिखाना कमज़ोरी की निशानी है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मदद माँगना यानी हार मान लेना” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “माँ-बाप के त्याग का मोल मुझे चुकाना है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मुझमें ही कुछ कमी है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मुझसे कोई ग़लती नहीं होनी चाहिए” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मुझे और की चाह नहीं रखनी चाहिए” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मुझे ग़ुस्सा नहीं आना चाहिए” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मुझे पहले ही समझ जाना चाहिए था” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मुझे बस ख़ुद पर ही भरोसा है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मुझे सबको ग़लत साबित करना है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मुझे हर बात बहुत लग जाती है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मुझे ही मज़बूत बने रहना है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मेरी राय की कोई गिनती नहीं” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मेरे किए बिना ये होगा ही नहीं” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “मेरे पास हर चीज़ का जवाब होना चाहिए” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “या तो एकदम सही, या बिल्कुल नहीं” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “ये मेरे बस की बात नहीं” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “वहाँ पहुँच जाने के बाद ही ख़ुशी मिलेगी” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “सब अच्छा चलता है तो कुछ गड़बड़ का इंतज़ार रहता है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “सब कुछ ठीक-ठाक दिखना चाहिए” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “सब कुछ प्लान के हिसाब से ही होना चाहिए” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “सब निपट जाए, तब चैन से बैठना है” क्यों आता है?
- मन में बार-बार “सब मुझे पसंद करें, ये ज़रूरी है” क्यों आता है?